जापान की शिक्षा नीति के बारेमे जानते है

दोस्तो जपान एक ऐसा देश है जो हर मुसिबत का सामना करने के बाद भी खडा हो रहा है. टेक्नॉलॉजी के क्षेत्र में जपानने प्रगती का नया मापदंड विकसित किया है. अणूबॉम के विस्फोट से ध्वस्त हुवे जापान ने नये से प्रगती की है. अपनी मेहनत और लगन से जपान के लोगो ने पूरी दुनिया के लिए मिसाल कायम की है. आज हम जानते है Japanese education policy के बारे मे.

तंत्रज्ञान के क्षेत्र में जपानने मिसाल कायम की है. जपान के लोगो मेहनत करने मे सबसे आगे रहते है. मेहनत करने का पाठ बचपन से ही बच्चो को दिया जाता है. क्षेत्रफल की तुलना करे तो हमारे देश से जपान बहुत छोटा देश है. लेकिन प्रगती की तुलना करे तो जपान हमसे बहुत आगे है. एक कारण Japanese education policy को भी दिया जाता है. आपको बता दे जपान में एक बच्ची के पढाई के लिए बिस सालो से ट्रेन चलाई जा रही है.

Japanese education policy

शिक्षा का महत्व जपान मे सब की समाज मे आगया है इसीलिये शिक्षा नीति के बारेमे जपान में गंभीरता से सोचते है. उपर जिस लडकी का जिक्र किया है उसका नाम है काना हरडा है. और वहा जहा से पढणे के लिए जाती है उस गाव का नाम है शीराटाकी. पिछले बीस सालो से इस गाव के लिए ट्रेन चलाई जा रही है. इस गाव की लोकसंख्या है केवल 63. जो दुर दराज इलाके मे है. यहा से ट्रेन मे सफर करने वाली काना है. अगले वर्ष यांनी 2021 मे उसकी पढाई पुरी होने वाली है. पढाई पुरी होने के बाद जपान सरकार यह ट्रेन बंद करनेका निर्णय लेने वाली है. अब आपको Japanese education policy का महत्व समज आया होगा.

जपानी है विनम्र और बुद्धिमान

जापानी लोग अक्सर अपनी बुद्धिमता, स्वस्थ जीवनशैली, सभ्यता और विनम्रता के लिए जाने जाते हैं. यहाँ के लोग विनम्र बुद्धिमान होने का श्रेय यहा की Japanese education policy को दिया जाता है. जपानी की शिक्षा निती सभी देशों के लिए आदर्श कही जा सकती है. विशेषकर भारत के लिये तो बहुत ही. जानते है जपान कि शिक्षा नीति के बारे मे.

ज्ञान प्राप्त करे और शिष्टाचार भी

जपान मे बच्चो को पढा आने के लिए चौथी श्रेणी तक पोहोचणे से पहले कोई परीक्षा नही होती है. यांनी उमर की दस वर्ष तक बच्चा कोई परीक्षा नही देता है. Japanese education policy मे स्कूल का लक्ष बच्चो को पहिले पाच सालो तक ज्ञान संपन्न करना होता है. बच्चो के अंदर शिष्टाचार स्थापित करना तथा उनके चरित्र का विकास करना होता है. मनो चिकित्सक कहते है बच्चो का मानसिक विकास पहिले पाच साल मे पूर्ण हो जाता है. यह बात जपान के लोगो जानते है इसीलिये पहिले पाच सालो तक चरित्र का विकास करते है.

शैक्षणिक वर्ष 1 अप्रेल से शुरू होता है

जापान के स्कुल अपने शैक्षणिक वर्ष की शुरूआत 1 अप्रेल से करते हैं. स्कूल का पहला दिन अक्सर खूबसूरत प्राकृतिक घटनाओं के साथ शुरू होता है. Japanese education policy के शैक्षणिक वर्ष तीन भागों में विभाजित होता हैः 1 अप्रेल से 20 जुलाई तक, 1 सितम्बर से 26 दिसम्बर तक, 7 जनवरी से 25 मार्च तक. जापानी छात्रों को गर्मियों के दौरान 6 सप्ताह की छुट्टियां मिलती है.

बच्चे करते है स्कूल की सफाई

बचपन से ही बच्चों मे स्वच्छता का महत्व बताने के लिए Japanese education policy मे नया तरीका अपनाया गया है. जब बच्चे स्कूल मे आते है तो स्कूल की सफाई करने के लिए कोई कर्मचारी नियुक्त नही होता है. जीस क्लास मे बच्चे बैठते है उसे बच्चे ही स्वच्छ करते है. बचपन से ही स्वच्छता का महत्व बच्चो के मन में अधोरेखित होता है. छात्रों द्वारा समूंह में कार्य करने से उनमें एक दूसरे की मदद करने की भावना का विकास होता है.

लोकप्रिय है Japanese education policy

अधिकांश जापानी छात्र एक अच्छे जुनियर हाई स्कूल में प्रवेश पाने के लिए एक प्रारंभिक स्कूल या निजी स्कूल की कार्यशालाओं में भाग लेते हैं. Japanese education policy का वह एक हिस्सा है. जापान में शाम के समय छोटे बच्चों को अतिरिक्त पाठयक्रम गतिविधियों (एकस्ट्रा करिकुलर एक्टिविटी) से वापस लौटते देखना आम बात है. जापान में छात्रों के स्कूल 8 घंटे लगते है. इस देश में छात्र प्राथमिक, निम्न माध्यमिक या माध्यमिक विद्यालय में कभी भी अपनी श्रेणियों (ग्रेडस) को दोहराते नहीं है.

अतिरिक्त विषय भी सिखते है छात्र

छात्र का सर्वांगीण विकास हो इसलिये जपान में पारंपरिक विषय के साथ बच्चो को उनके रुचि के अनुसार विषय दिखाये जाते है. Japanese education policy का यह एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा है. पारंपरिक चित्रकला सदियों पूरानी परंपराओं का सम्मान करना छात्र को सिखाती है.

Japanese education policy 99 प्रतिशत

जपान मे स्कूल शुरू होने के समय छात्र की उपस्थिती लगभग 99 प्रतिशत होती है. और यही Japanese education policy यशस्विता कही जा सकती है. जापानी छात्र कभी कक्षांए छोड़ते नहीं है और स्कूल में भी कभी देरी से नहीं आते है. इसके अलावा जापान में लगभग 91 प्रतिशत विद्यार्थियों ने बताया है कि उन्होंने कभी नहीं या केवल कुछ कक्षाओं में शिक्षक ने जो पढ़ाया है उसे नजरअंदाज किया है.

एकल परीक्षा छात्रों का भविष्य तय करती है

हाई स्कूल की पढाई पूरी करने के बाद छात्र को बहुत ही महत्वपूर्ण परीक्षा देनी होती है, जो उनका भविष्य तय करती है. एक विद्यार्थी एक कॉलेज चुन सकता है लेकिन उस कॉलेज में जाने के लिए उसे एक निश्चित स्कोर की जरूरत पड़ती है. यदि कोई विद्यार्थी इस निश्चित स्कोर तक नहीं पहुंच पाता तो फिर उसे उसके द्वारा चुना गया कॉलेज नही मिल पाता है. Japanese education policy में कम्पटीशन बहुत अधिक होने के कारण केवल 76 प्रतिशत स्कूल से पास विद्यार्थी ही अपनी आगे की शिक्षा जारी रख पाते हैं.

शिक्षा के साथ ही बच्चो को उच्च गुणवत्ता वाले व्यक्तित्व बनाने के लिए लिये Japanese education policy काम करती है. शिक्षा के लिए सरकार भी भरपूर प्रयास हमेशा से करती आ रही है. शिक्षा क्षेत्र के सामने आने वाली समस्या को दूर करने के लिए यहापर जोरकस प्रयास किये जाते है. जिस का असर हमे जपान कि प्रगती मे दिखता है.

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शिक्षा यानी education जो हमारे जीवन को संस्कारित करती है. हमारे जीवन को आकार देती है. प्रेरणा यानी motivation हमे हर परिस्थिती से लढणे का बल प्रदान करती है. Education and motivation ये दोनो शब्द हमारे जीवन में काफी महत्व रखते है. Education और motivation इस विषय को लेकर हिंदी मे ब्लॉग लिख रहा हू, जिसका नाम है worldtruthblog.

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