बुनियादी शिक्षा की संकल्पना नई तालीम

दोस्तो हमारे देश के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एक अद्भुत व्यक्ती थे. जिंका चरित्र आज भी लोगो को सही राह पर चलने के लिए प्रेरित करता है. गांधीजीने बुनियादी शिक्षा का महत्व देणे के लिये nai talim की रचना बनाई है. जो वर्तमान स्थिती मे बहुत खूप उपयोगी साबित हो रही है. जानते है क्या है नई तालीम.

शिक्षा के क्षेत्र मे आज बहुत बदलाव आये है. हररोज शिक्षा का नया तरीका हमारे सामने आ रहा है. इन सब के बावजूद भी हमे उचित शिक्षा के लिए विकल्प धुंडणा पड रहे है. ऐसा क्यू हो रहा है… इसकी खोज हमे करनी होगी.. फिलहाल हम जानते है Nai talim के बारे मे.

क्या है Nai talim का मतलब

आपको बता दे सबसे पहले नई तालीम को हिंदुस्तानी तालीमी संघ के नाम से जाना जाता था. वर्धा मे जब कांग्रेस का संमेलन 1937 मे हुआ तब बुनियादी शिक्षा की संकल्पना सामने आयीं. Nai talim का मतलब महात्मा गांधी जी ने समझाया है, वे कहते है…शोषण-विहीन समाज की स्थापना करना, उसके लिए सभी को शिक्षित होना चाहिए. क्योंकि शिक्षा के अभाव में एक स्वस्थ समाज का निर्माण असंभव है.

नई तालीम की शुरुवात कब हुई

महात्मा गांधीजी स्वतंत्रता के आंदोलन मे आगे रहते थे. दुसरी और शिक्षा और सामाजिक विकास के लिये प्रयत्नशील थे. 23 अक्तूबर 1937 को nai talim की योजना बनाई गई. सुरुवाती दोर मे शिक्षा की नई प्रणाली को विरोध किया गया. लेकिन जब उसका महत्व समज आया तब इस स्वीकार किया गया.

नई तालीम दिवस कब मनाते है

शिक्षा के क्षेत्र को नये आयाम देणे मे महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली nai talim शिक्षा प्रणाली को मनाने के लिए गांधी जयंती का अवसर सबको अच्छा लगा. इसीलिये 2 अक्तूबर को यांनी गांधी जयंती के दिन नई तालीम दिवस मनाया जाता है. इस दिन वर्धा कि संस्था मे विभिन्न कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है.

क्या पढाते है nai talim मे

वर्धा मे स्थित यह संस्था महाराष्ट्र राज्य के अंतर्गत शैक्षणिक कार्य को पूरा कर उनकी मूल्य को साथ लेकर चलती है. nai talim शिक्षा प्रणाली को ग्रहण करने के बाद छात्र कभी भी बेरोजगारी का सामना नही करता. सामाजिक जीवन में वह अपना रोजगार खुद बनाता है.

1 वर्धा की संस्था से पडा हुआ बच्चा कही भी अपना जीविकापार्जन कर सकता है.

2 संस्था मे कोई अलग संसाधन उपलब्ध नही है सिर्फ यह छोटासा ग्रंथालय है. जिसमे बच्चे अध्ययन करते है.

3 nai talim की शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्र जमीन पर बैठकर पढाई करते है.

4 पाठ्यक्रम के अलावा बच्चो को साफ सफाई, खाना बनाना, खेती करना, खेती से उत्पादित फसल बाजार मे बेचना यह काम भी करने पडते है. इसे पाठ्यक्रम का हिस्सा माना जाता है.

5 बच्चो मे व्यावहारिक दृष्टिकोन विकसित करने के लिए यह उपयुक्त है, ऐसा माना जाता है. जो सही भी है.

6 नई तालीम संस्था महाराष्ट्र राज्य सरकार के साथ शैक्षणिक संबंध रखती है. बजाज ट्रस्ट और मानदेय ट्रस्ट इनसे ज़रूरत पड़ने पर मदद भी ली जाती है.

बुनियादी शिक्षा की संकल्पना nai talim

महात्मा गांधीजी का यह मानना था की बुनियादी शिक्षा बहुमूल्य और महत्वपूर्ण है. गाँधी जी ने 23 अक्टूबर 1937 को ‘nai talim की योजना बनाई. बुनियादी प्रशिक्षण और प्राथमिक स्तर की शिक्षा के दो स्तर थे- स्कूली बच्चे कक्षा-एक से ही तकली से सूत कातते थे; रूई से पौनी बनाते थे और सूत की गुड़िया बनाकर खादी भंडारों को देते थे. या बैठने के आसन, रुमाल, चादर आदि बनाते थे. शिक्षार्थियों को शिक्षा प्राप्त करने के साथ-साथ कुछ धनोपार्जन भी कर लेना चाहिए जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें. इसी उद्देश्य को लेकर उन्होंने ‘वर्धा शिक्षा योजना’ बनायी थी.

शिक्षा के क्षेत्र में गांधीजीने अपने योजना से एक ऐसा पाठ्यक्रम बनाया है जो छात्र को आत्मनिर्भर बनता है. nai talim के माध्यम से छत्रपती आई करते वक्त अन्य व्यवसाय करणे की जानकारी हासिल करता है. जो उसके आने वाले भविष्य को उज्वल बनती है.

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शिक्षा यानी education जो हमारे जीवन को संस्कारित करती है. हमारे जीवन को आकार देती है. प्रेरणा यानी motivation हमे हर परिस्थिती से लढणे का बल प्रदान करती है. Education and motivation ये दोनो शब्द हमारे जीवन में काफी महत्व रखते है. Education और motivation इस विषय को लेकर हिंदी मे ब्लॉग लिख रहा हू, जिसका नाम है worldtruthblog.

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