जानते है महिला शिक्षा से जुडे तथ्य

वर्तमान समय मे हर क्षेत्र मे महिला पुरुष के समान कार्य करती है. महिला को अधिकार दिये गये है. फिरभी कुछ ऐसे क्षेत्र है जहा महिला अब भी पीछे दिखती है और वह शिक्षा का क्षेत्र है. आज भी हमारे देश में महीला शिक्षा के क्षेत्र में पीछे है. आज हम जानते है महीला शिक्षा से जुडे तथ्य के बारे मे. भारत में Women education fact क्या है यह आज जानते है.

प्रकृतीने महिला और पुरुष दोनो को समान बनाया है. फिर भी पुरुष प्रधान समाज मे महिला को समान हक्क नही मिलता है. ऐसे अनेक क्षेत्र है जिसमे महिला वर्ग काफी बिछडा हुआ है. ऐसा ही एक क्षेत्र है education. महिला को जादा पढाना नही चाहिये ऐसी मानसिकता आज भी समाज मे देखने मे मिलती है.

भारत की पहली महिला शिक्षक के बारे मे जाने : Savitribai Phule Indias first teacher

Women education fact

भारत के संदर्भ मे विचार करे तो अपने देश में पहले ही शिक्षा क्षेत्र विकसित नही हुआ है. उसमे भी महीला शिक्षा का प्रमाण बहुत कम है. वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, देश में women education दर मात्र 64.46 फीसदी है, जबकि पुरुष साक्षरता दर 82.14 फीसदी है. ये आकडे हमे यह बताते है महिला साक्षरता का दर भारत में विश्व की तुलना में काफी कम है. बहुत कम लड़कियों का स्कूलों में दाखिला कराया जाता है और उनमें से भी कई बीच में ही पारिवारिक कारण से स्कूल छोड़ देती हैं. एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में आज भी 145 मिलियन महिलाएँ पढ़ने या लिखने में असमर्थ हैं.

Women education का इतिहास

अब हमे इस मुद्दे को समझने के लिए women education का इतिहास जानना होगा. यह इतिहास हम तीन भाग देख सकते है. प्राचीन वैदिक काल, ब्रिटिश इंडिया और स्वतंत्र भारत में.

प्राचीन वैदिक काल मे महिला शिक्षण

यदी हम महिला शिक्षा का इतिहास देखने जाये तो यह वेदिक काल के मे हमे लेके जाता है. आज से तीन हजार वर्ष पहिले महिलाओं को समाज में एक प्रतिष्ठित स्थान प्राप्त था और उन्हें पुरुषों के समान समाज का एक महत्त्वपूर्ण अंग समझा जाता था. education fact की नजर से यदी देखे तो महिलाओं की देवी के रूप में पूजा शुरू हुई- उदाहरण के लिये शिक्षा की देवी सरस्वती. वैदिक साहित्य में उन महिलाओं का भी उल्लेख किया गया है जिन्होंने वैदिक अध्ययन का रास्ता चुना.

ब्रिटिश इंडिया मे महिला education

अंग्रेजो के काल मे भारत मे शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव आये.1821 में दक्षिण भारत के तिरुनेलवेली मे पहला ऑल-गर्ल्स बोर्डिंग स्कूल स्थापित किया गया. वर्ष 1848 में पुणे में गर्ल्स स्कूल की शुरुआत करने वाले ज्योतिबा फुले और उनकी पत्नी सावित्री बाई पश्चिमी भारत में भी महिला शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी थे. ईस्ट इंडिया कंपनी के कार्यक्रम वुड्स डिस्पैच ने वर्ष 1854 में महिलाओं की शिक्षा और उनके लिये रोज़गार की आवश्यकता को स्वीकार किया. अँग्रेजो की काल मे
Women education की काफी सराहना की गयी.

जानते है स्वतंत्र भारत की स्थिति

हमारे देश को आजादी मिलने के बाद 1958 में सरकार ने महिला शिक्षा पर एक राष्ट्रीय समिति का गठन किया, जिसकी सभी सिफारिशें स्वीकार कर ली गईं. इसके बाद 1964 मे शिक्षा आयोग की स्थापना की गई जिसमे women education का विषय बडे पैमाने पर शामिल किया गया. यहा से भारत में महिला शिक्षा के क्षेत्र में काफी बदलाव आये और सुधारणा भी हुयी.

Women education fact की बाधाएँ

अपने देश के संदर्भ मे विचार करे तो यहा पर बहुत सारे विषय हमारे सामने आज भी सवाल बनकर खडे है. सबसे बडा सवाल women education काका सामने आता है. आज भी महिला के शिक्षा के संदर्भ में बहुत सारी बाधाएँ देखणे मिलती है. आज जानते है उनके बारे मे…

• महिलाओं को पुरुषों के बराबर सामाजिक दर्जा नहीं दिया जाता है और उन्हें घर की चहारदीवारी तक सीमित कर दिया जाता है.

• हालाँकि ग्रामीण क्षेत्रों की अपेक्षा शहरी क्षेत्रों में स्थिति अच्छी है.

• लैंगिक असमानता की चुनौती हमारे समक्ष एक कठोर वास्तविकता के रूप में खड़ी है. शहरी महिलाएँ भी लैंगिक असमानता का अनुभव करती हैं.

• देश में महिला सुरक्षा अभी एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है, जिसके कारण कई अभिभावक लड़कियों को स्कूल भेजने से कतराते हैं.

उपर दी गई बाधाएँ women education को रोक लगाती है. यही दूसरी और सरकार महीला शिक्षा के लिये भरकस प्रयास कर रही है.

women education के लिए सरकार के प्रयास

समाज के विकास हेतू सरकार हमेशा विविध योजना लागू करती है. शिक्षा के क्षेत्र में भी सरकार द्वारा 2015 मे ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ की शुरुआत की गई थी. महिला और बाल विकास मंत्रालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय तथा मानव संसाधन मंत्रालय की संयुक्त पहल है. इस योजना के चलते कन्या भ्रूण हत्या रोकने, स्कूलों में लड़कियों की संख्या बढ़ाने, स्कूल छोड़ने वालों की संख्या को कम करने, शिक्षा के अधिकार के नियमों को लागू करने और लड़कियों के लिये शौचालयों के निर्माण में वृद्धि करने जैसे उद्देश्य निर्धारित किये गए हैं.

इन सभी मुद्दो के अलावा भी और बहुत सारे fact हे जिन पर हमे विचार करना आवश्यक है. महीला शिक्षा तो के लिये हम सभी को प्रयास करना जरुरी है. हमको यह बात जा नना आवश्यक है यदि महिला पडती है तो उसका परिवार शिक्षित होता है. इसलिये महिला का सीखना बहुत जरुरी है.

Author

शिक्षा यानी education जो हमारे जीवन को संस्कारित करती है. हमारे जीवन को आकार देती है. प्रेरणा यानी motivation हमे हर परिस्थिती से लढणे का बल प्रदान करती है. Education and motivation ये दोनो शब्द हमारे जीवन में काफी महत्व रखते है. Education और motivation इस विषय को लेकर हिंदी मे ब्लॉग लिख रहा हू, जिसका नाम है worldtruthblog.

Write A Comment

twenty − 14 =