भारतीय सीमा सुरक्षा की ज़िम्मेदारी मे सबसे अहम हुमिका निभानेवाले अजीत डोभाल अपनेआप मे एक मिसाल है. उनका संपूर्ण जीवन भारत माता की सेवा मे समर्पित है. जानते  है Ajit Dobhal ki Kahani जी के बारे मे.  

डोभाल जी पढाई

डोभाल जी का जन्म साल 1945 उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल में हुआ था. शुरुआती शिक्षा अजमेर के मिलिट्री स्कूल से पूरी की और फिर इसके बाद इन्होने आगरा विश्व विद्यालय से अर्थशास्त्र में एमए किया. फिर आईपीएस की तैयारी में जुट गए. कड़ी मेहनत के दम पर डोभाल जी  1968 में आईपीएस के लिए सिलेक्ट हो गए. Ajit Dobhal ki Kahani नियुक्ती केरल कैडर में मिली थी. पंजाब और मिजोरम में हुये उग्रवाद विरोधी आंदोलन में वे शामिल थे. मिजोरम में डोभाल जी ने मिज़ो नेशनल फ्रंट को शक्तिहीन किया और वहां शांति की स्थापना की.

डोभाल जी के कारनामे

इसके बाद साल 1999 में कंधार में आईसी-814 में यात्रियों के अपहरण के मुद्दे पर रिहाई के मुद्दे पर देश की ओर से बात की थी. Ajit Dobhal ki Kahani अलावा 1971 से 1999 तक हुये सभी 15 हाईजेकिंग में शामिल हुये.

एक दशक से भी अधिक समय तक आईबी के संचालन विंग का नेतृत्व करने का अनुभव प्राप्त है. आतंक निरोधी कार्यो के लिए भारत के तीसरे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एम के नारायणन के द्वारा ट्रेनिंग भी प्राप्त की हुई है.Ajit Dobhal ki Kahani 1988 में ऑपरेशन ब्लैक थंडर के पहले इन्होने स्वर्ण मंदिर में प्रवेश कर महत्वपूर्ण जानकारियाँ एकत्रित की थी.

2005 में जनवरी के महीने में इंटेलेजेंसी ब्यूरो के डाइरेक्टर के पद से निवृत्त हुये. इसके बाद साल 2019 में ये विवेकानंद इंटरनेशनल फ़ाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष बने.

भारत के सुरक्षा सलाहगार

साल 2014 में कैरियर का एक अहम मोड आया और ये भारत के पांचवे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के रूप में नियुक्त हुये. Ajit Dobhal ki Kahani 2014 में ही 46 भारतीय नर्सों की रिहाई में महवपूर्ण भूमिका निभाई, जो इराक में फसी हुई थी सेना प्रमुख के साथ म्यांमार के बाहर चल रहे आतंकवादियों के खिलाफ अभियान में डोभाल जी ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, यह अभियान 50 आतंकवादियों को ढेर करते हुये एक सफल अभियान साबित हुआ था.

डोभाल जी को पाकिस्तान के संबंध में भारतीय सुरक्षा नीतियों में बदलाव करने का श्रेय भी प्राप्त है. 2016 में हुई सर्जिकल स्ट्राइक में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण थी.

डोभाल जी को मिले अवार्ड

डोभाल जी को अनगीनत अवार्ड मिले है.

डोभाल जी पुलिस मेडल पाने वाले सबसे कम उम्र के अधिकारी थे.

प्रेसिडेंट पुलिस मेडल से भी उन्हे नवाजा गया है.

1988 में डोभाल जी ने सर्वोच्च वीरता पुरुस्कार कीर्ति चक्र भी प्राप्त किया है.

डोभाल जी उन लोगों में से एक है, जो सीमा पर ना रहकर भी हमारी सुरक्षा के लिए साल में 12 महीने, सप्ताह में 7 दिन और दिन में 24 घंटे लगे हुये है.

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शिक्षा यानी education जो हमारे जीवन को संस्कारित करती है. हमारे जीवन को आकार देती है. प्रेरणा यानी motivation हमे हर परिस्थिती से लढणे का बल प्रदान करती है. Education and motivation ये दोनो शब्द हमारे जीवन में काफी महत्व रखते है. Education और motivation इस विषय को लेकर हिंदी मे ब्लॉग लिख रहा हू, जिसका नाम है worldtruthblog.

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