दोस्तो हमारा देश प्राचीन परंपरा संजोये हुए है. इस देश के हर कोने मे हमे प्राचीन परंपरा के तथ्य देखने को मिलते है. आज हम बात करने जा रहे है भाई बहन के मंदिर के बारे मे. बिहार राज्य के एक छोटेसे गाव सिवान मे brother sisters temple है. यहापर रक्षाबंधन के दिन श्रद्धालु की भीड जमा होती है. जानते है इस मंदिर के बारे मे.

हमारे देश के हर कोने मे आनेवाली पिढी को इतिहास बताने के लिए बहुत सारी बाते छुपी है. आज भी हम इनो स्थानो से प्रेरणा लेते रहते है. हमारे देश की यही एक विशेषता रही है. बिहार राज्य के सिवान गाव मे भैया बहिनी का प्राचीन मंदिर खडा है. इस मंदिर के बारे में कुछ लोककथा प्रचलित है. बिहार राज्य के दरभंगा प्रखंड के भीकाबांध मे यह मंदिर आता है.

Brother sister temple history

इस Brother sisters temple मंदिर की लोक कथा कुछ इस प्रकार है, मुगल के शासन काल मे रक्षाबंधन के दो दिन पूर्व एक व्यक्ती ससुराल भभुआ से अपनी बहन को लेकर जा रहा था. भिकाबांध गाव के नजदीक आते ही मुगल सैनिको की नजर उन पर पडी. सैनिकोने बहन की डोली रोक कर उनके साथ बत्तमीजी की. बहन की रक्षा करने के लिए भाई ऊन सैनिको से भीड गया. लेकिन सैनिक अधिक संख्या मे होने की वजह से भाई कमजोर पड गया. सैनिको ने भाई की हत्या कर दी. उस वक्त बहने पुरी श्रद्धा के साथ भगवान को पुकारा और धरती से कहा कि मुझे, मेरे भाई को अपणी शरण मे लेलो. तभी धरती पट्टी और दोनो भाई बहनो को अपने अन्दर धरतीने समेट लिया. जहाँ दोनो भाई बहन धरती मे समा येथे उसी जगह पर बर्गत के दो पेड निर्माण हुये.

वटवृक्ष आज भी मौजूद

जहाँ धरती मे दोनो भाई बहन समा येथे ऊसी जगह पर दो वटवृक्ष निर्माण हुये थे. इन दोनो पेड को देखकर यह लगता है कि भाई अपनी बहन की रक्षा कर रहा है. यह दोनों वटवृक्ष आज भी मौजूद है. दोनो वृक्ष पाच बिघा जमीन मे फेल गये है. उस स्थान पर पहिले मिट्टी का मंदिर बनाया था Brother sisters temple अब वहा पर पक्का मंदिर बनाया हुआ है.

श्रद्धालूंकी होती है भीड

इस जगह पर रक्षाबंधन के दिन श्रद्धालूंकी बहुत भीड जमा होती है. लोगो की यह मान्यता है कि यहा मन्नत मांगने से पुरी होती है. रक्षाबंधन के दिन यहापर पेड मे राखी बांधी जाती है. पेड को राखी बांधणे के बाद ही बहन ने भाई की कलाई मे राखी बांधते है. वैसे तो यहा पुरे साल भर लोगो की भीड होती है. सावन की पूर्णिमा और शुक्लपक्ष की अनंतचतुर्दशी के दिन यहापर श्रद्धालु आते है. सिवान, सारण, गोपालगंज, पूर्वी चंपारण, पाटणा इन जीलो के साथ ही झारखंड से भी श्रद्धालू यहा आते है.

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शिक्षा यानी education जो हमारे जीवन को संस्कारित करती है. हमारे जीवन को आकार देती है. प्रेरणा यानी motivation हमे हर परिस्थिती से लढणे का बल प्रदान करती है. Education and motivation ये दोनो शब्द हमारे जीवन में काफी महत्व रखते है. Education और motivation इस विषय को लेकर हिंदी मे ब्लॉग लिख रहा हू, जिसका नाम है worldtruthblog.

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