प्राचीन सभ्यता संस्कृती को लेकर हमारा देश आगे बढ रहा है. हमारे देश में ही परंपरा चल रही है. गणेश उत्सव की परंपरा भी ऐसेही चली आ रही है. घर घर मे गणेश जी की स्थापना की जाती है. महाराष्ट्र के साथ ही पूरे देश मे उत्सव मनाया जाता है. गणेश जी बुद्धी समृद्धी और सौभाग्य के देवता होने के कारण सभी के लिए यह पूजनीय है. Ganesh chaturthi 2020 के बारेमे जानते है.

गणेश चतुर्थी का यह उत्सव महाराष्ट्र मे बडी धूम धाम से मनाया जाता है. वैसे तो यह सार्वजनिक उत्सव है, लेकिन इस बार कोरोना के चलते कुछ मर्यादा आ गयी है. गणेश चतुर्थी का यह पर्व 10 दिनो तक चलता है.

गणेशउत्सव की शुरुवात किसने की

Ganesh chaturthi 2020 का समय नजदीक आ गया है. महाराष्ट्र में गणेश उत्सव मनाने की परंपरा पेशवा ने शुरू की. पेशवा सवाई माधवराव के शासन काल मे पुणे मी स्थित शनिवार वाडा सुसज्जित किया जाता था. इसके बाद स्वतंत्रता सेनानी लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने की थी. तिलक जिने गणेश उत्सव को सार्वजनिक स्वरूप दिया. उनका यह मानना था की ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ लढणे के लिए सभी समाजको एकत्रित लाने का यह अच्छा उपाय साबित होगा. उत्सव के दौरान देशभक्तीपर आधारित कार्यक्रम का आयोजन किया जाता था. यह उत्सव महाराष्ट्र में काफी लोकप्रिय हुआ.

कब है गणेश चतुर्थी

Ganesh chaturthi 2020 कब मनाई जाती है. भाद्रपद महके शुक्लपक्ष मे भगवान गणेश जी का जन्म हुआ था. गणेश चतुर्थी चा हिरो दिन ऑगस्ट या सितंबर महीने मे आता है. वीस वर्ष गणेश चतुर्थी 22 अगस्त को है. जिस दिन महाराष्ट्र मे हर जगह गणेश जी की स्थापना की जायेगी. वीस वर्ष कोरणा काल के कारण सार्वजनिक कार्यक्रम मर्यादित स्वरूप मे होंगे.

पूजा का समय- 11:06 am से 01:42 pm

गणेश विसर्जन मंगलवार, सितम्बर 1, 2020 को

पूरे विश्व में है गणेश उत्सव

Ganesh chaturthi 2020 अगस्त महीने में यह उत्सव शुरू होने जा रहा है. महाराष्ट्र के साथ पूरे देश मे उत्सव मनाया जाता है. भगवान गणेश जी बुद्धी के देवता है. और उनकी पूजा अग्रस्थान पर होती है. Ganesh chaturthi 2020 भारत के साथ साथ गणेश उत्सव का आयोजन थायलँड, कंबोडिया, इंडोनेशिया, अफगाणिस्तान, नेपाळ और चायना मे भी किया जाता है.

गणेश जी की मुर्ती कोनसे रंग की हो

Ganesh chaturthi 2020 करीब आ गये है और हम सब अपने घर मे गणेश जी की मुर्ती को स्थापित करने वाले है. शास्त्र के अनुसार गणेश जी की की हर रंग की मुर्ती ती के पूजन का फल अलग होता है. पिले और लाल रंग की मुर्ती की उपासना शुभ मानी जाती है.

गणेश जी की सफेद रंग की मुर्ती सभी ऋण असे मुक्त करती है.
चार्भुजाओवाले गणपती ही उपासना से सभी संकट दूर होते है.
घरो मे गणेश जी की मुर्ती स्थापन करते वक्तइस बात का ध्यान रखे गणेश जी की मुर्ती खडी ना हो बैठी हो.
बाई सूंड वाले गणपती की स्थापना घरो मे करणा उचित होता है.
भगवान गणेश जी को मोदक अतिप्रिय है. इसके साथ ही गणेश जी को दुर्वा चढाने से सभी मनोकामना पूर्ण होती है.

महाराष्ट्र के अष्टविनायक

Ganesh chaturthi 2020 के इस अवसर पर महाराष्ट्र में स्थित गणेश जी के अष्टविनायक स्थान की जानकारी आपको देते है. गणेश जी के 8 मंदिर महाराष्ट्र मे प्रसिद्ध है जो अष्टविनायक के नाम से जाने जाते है.

श्री मयूरेश्वर मंदिर (मोरगांव, पुणे) : पुणे शहर से यह मंदिर 80 किलोमीटर की दूरी पर है. इस मंदिर के चारो और मीना रे बनी है. कहा पर चार दरवाजे है. ये चारो दरवाजे त्रेतायुग, सतयुग द्वापार युग और कलियुग के प्रतीक माने जाते है.

सिद्धिविनायक मंदिर (अहमदनगर) : यह मंदिर अहमदनगर जिले मे है. सिद्धटेक गाव के अंतर्गत यह आता है. यह मंदिर करीब दो साल पुराना है. आश्रम माना जाता है यहा पर भगवान विष्णूने सिद्धी हासिल की थी. इसलिये सिद्धिविनायक कहते है. यह मंदिर पहाडी मे स्थित है.

श्री बल्लालेश्वर मंदिर (पाली गाँव, रायगढ़) : गणेश जी के परमभक्त बल्लाल के नाम से यह मंदिर प्रसिद्ध हुआ है. मुंबई पुणे हायवे पर ग्यारा किलोमीटर दूर स्थित यह मंदिर हे.

श्री वरदविनायक (कोल्हापुर, रायगढ़) : कोल्हापूर क्षेत्र में यह मंदिर आता है. इस मंदिर के गणेश जी बघतो की मनोकामना पूर्ण करते है इसलिये वरदविनायक कहा जाता है. इस मंदिर में काही वर्षे नंदादीप प्रज्वलित है.

चिंतामणि गणपति (थेऊर गांव, पुणे) : पुणे जिले के हवेली क्षेत्र मे यह मंदिर आता है. मंदिर के पास भीमा, मुळा और मुठा तीन-तीन नदियों का संगम है. ऐसा माना जाता है कि यहापर स्वयम् ब्रह्मा जी ने तपस्या की है.

श्री गिरजात्मज गणपति (लेण्याद्री गांव, पुणे) : यह मंदिर नासिक पुणे मार्ग पर स्थित है. नारायण गावची मंदिर 12 किलोमीटर की दूरी पर है. यह मंदिर पहाड कि एक गुफा मे बनाया है. यहापर 18 बौद्ध गुफाये है तिने आठवी गुफा मे गणेश जी का मंदिर है. मंदिर तक पोहोचणे के लिए 300 सीढ़ियां चढणी पडती है.

विघ्नेश्वर गणपति मंदिर (ओझर) : पुणे जिले के जुन्नर क्षेत्र मे यह मंदिर आता है. प्राचीन कथा के अनुसार गणेश जी ने विघ्नासूर नामक असुर का वध किया था इसलिये ऊन्हे विघ्नेश्वर कहा जाता है. यह क्षेत्र रमणीय है.

महागणपति मंदिर (राजणगांव) : पुणे-अहमदनगर राजमार्ग पर यह मंदिर रांजणगाव में स्थित है. मंदिर का प्रवेश द्वार पूर्व दिशा की और है जो बहुत विशाल है. यहा पर गणेश जी की मुर्ती विषाल स्वरूप मे मौजूद है इसलिये महागणपती कहा जाता है.

Ganesh chaturthi 2020 के इस अवसर पर महाराष्ट्र के साथ पूरे देश मे हर्ष उल्हास का वातावरण हो गया है. कोरूना की बिमारी से गणेश जी हम सभी को राहत देंगे विश्वास सब के मन में निर्माण हुआ है. दस दिनो के बाद गणेश जी का विसर्जन किया जाता है.

गणेश उत्सव की अधिक जानकारी के लिए आप इस लिंक पर भी जा सकते है

https://www.google.com/amp/s/hindime.net/ganesh-chaturthi-kyu-manai-jati-hai-hindi/%3famp

Author

शिक्षा यानी education जो हमारे जीवन को संस्कारित करती है. हमारे जीवन को आकार देती है. प्रेरणा यानी motivation हमे हर परिस्थिती से लढणे का बल प्रदान करती है. Education and motivation ये दोनो शब्द हमारे जीवन में काफी महत्व रखते है. Education और motivation इस विषय को लेकर हिंदी मे ब्लॉग लिख रहा हू, जिसका नाम है worldtruthblog.

Write A Comment

two × 3 =