हमारे देश को आजाद हुये लगभग 74 साल हो रहे है. इन कई सालो मे इस पहलीबार अलग तरीकेसे मनाया जायेगा हमारा independence day. कोरोना के इस माहोल मे आईये जानते है कैसा होगा इस बार का हमारा independence day.

इतिहास के पन्नोसे

यूरोपीय व्यापारियों ने 17वीं सदी से ही भारत  में पैर जमाना आरम्भ कर दिया था. सैन्य शक्ति में बढ़ोतरी करते हुए इस्ट इंडिया कम्पनीने 18वीं सदी के अन्त तक स्थानीय राज्यों को वशीभूत कर लिया था. 1857 प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के बाद  भारत पर सीधा आधिपत्य ब्रिटेन की राजशाही का हो गया. दशकों बाद महात्मा गांधी के नेतृत्व में असहयोग और सविनय अवज्ञा आंदोलनों तथा राष्ट्रव्यापी अहिंसक आंदोलनों की शुरूआत हो गयी.

भारत हुवा आझाद

स्वतंत्रता आदोलन के चलते भारत मे आझादी का माहोल निर्माण हो गया था. फ़रवरी 1947 में प्रधानमंत्री एटली ने ये घोषणा की कि ब्रिटिश सरकार जून 1948 से ब्रिटिश भारत को पूर्ण आत्म-प्रशासन का अधिकार प्रदान करेगी.  अंतिम वायसराय लार्ड mauntbeten ने सत्ता हस्तांतरण की तारीख को आगे बढ़ा दिया. युनायटेड किंग्डम की संसद के भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 (10 और 11 जियो 6 सी. 30) के अनुसार 15 अगस्त 1947 से प्रभावी (अब बांग्लादेश सहित) ब्रिटिश भारत को भारत और पाकिस्तान नामक दो नए स्वतंत्र उपनिवेशों में विभाजित किया और नए देशों के संबंधित घटक असेंबलियों को पूरा संवैधानिक अधिकार दे दिया. 18 जुलाई 1947 को इस अधिनियम को शाही स्वीकृति प्रदान की गयी. इसके बाद भारत आझाद हुवा, independence day हुवा.

वर्तमान स्थिती मे स्वतंत्रता दिवस

देश आजादी का जश्न मनाने की तैयारी कर रहा है.  लेकिन इस परिस्थिती काफी विपरीत है. कोरोका का माहोल सब तर्फ छाया है. फिरभी independence day के कार्यक्रम की चमक फीकी नहीं हुई. इस बार भी आजादी के जश्न को लेकर वही जोश है, लेकिन इस बार कोरोना वायरस ने चुनौतियां हैं. 74 साल में पहली बार independence day समारोह का आयोजन अलग होगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाल किले से देश को संबोधित करेंगे, तब प्रांगण में कम ही मेहमान नजर आएंगे. जो सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए दूर-दूर बैठे होंगे. 

सार्वजनिक आयोजन नही

आमतौर पर independence day समारोह के मौके पर सरकारी कार्यालयों, स्कूलों आदि में समारोह का आयोजन होता है. मगर इस बार ऐसा नहीं होगा. गृह मंत्रालय ने राज्यों और राज्यपालों के निर्देश दिए हैं कि सार्वजनिक आयोजनों से बचा जाए. समारोह के लिए प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल किया जाएगा. इस बार independence day कार्यक्रम में स्कूली बच्चे भी नजर नहीं आएंगे. सार्वजनिक कार्यक्रमों पर रोक लगी हुई है.

कोरोना के उपायों पर अमल

इस स्म्रोह मे आये मेहमानो के लिये जगह-जगह हैंड सैनिटाइजर रखे जाएंगे. सभी के लिए मास्क पहनकर आना जरूरी होगा. बैठने की अलग व्यवस्था होगी और दो गज की दूरी सुनिश्चित की जाएगी. लाल किले के आसपास तैनात पुलिसकर्मी पीपीई किट पहने हुए दिखाई देंगे. इसके अलावा थीम कोरोना योद्धाओं को समर्पित की जाएगी.

ट्रिस्ट विद डेस्टिनी

स्‍वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरूजी के भाषण के अंश

कई सालों पहले, हमने नियति से एक वादा किया था, और अब समय आ गया है कि हम अपना वादा निभायें, पूरी तरह न सही पर बहुत हद तक तो निभायें। आधी रात के समय, जब दुनिया सो रही होगी, भारत जीवन और स्वतंत्रता के लिए जाग जाएगा। ऐसा क्षण आता है, मगर इतिहास में विरले ही आता है, जब हम पुराने से बाहर निकल नए युग में कदम रखते हैं, जब एक युग समाप्त हो जाता है, जब एक देश की लम्बे समय से दबी हुई आत्मा मुक्त होती है। यह संयोग ही है कि इस पवित्र अवसर पर हम भारत और उसके लोगों की सेवा करने के लिए तथा सबसे बढ़कर मानवता की सेवा करने के लिए समर्पित होने की प्रतिज्ञा कर रहे हैं।… आज हम दुर्भाग्य के एक युग को समाप्त कर रहे हैं और भारत पुनः स्वयं को खोज पा रहा है। आज हम जिस उपलब्धि का उत्सव मना रहे हैं, वो केवल एक क़दम है, नए अवसरों के खुलने का। इससे भी बड़ी विजय और उपलब्धियां हमारी प्रतीक्षा कर रही हैं। भारत की सेवा का अर्थ है लाखों-करोड़ों पीड़ितों की सेवा करना। इसका अर्थ है निर्धनता, अज्ञानता, और अवसर की असमानता मिटाना। हमारी पीढ़ी के सबसे महान व्यक्ति की यही इच्छा है कि हर आँख से आंसू मिटे। संभवतः ये हमारे लिए संभव न हो पर जब तक लोगों कि आंखों में आंसू हैं, तब तक हमारा कार्य समाप्त नहीं होगा। आज एक बार फिर वर्षों के संघर्ष के बाद, भारत जागृत और स्वतंत्र है। भविष्य हमें बुला रहा है। हमें कहाँ जाना चाहिए और हमें क्या करना चाहिए, जिससे हम आम आदमी, किसानों और श्रमिकों के लिए स्वतंत्रता और अवसर ला सकें, हम निर्धनता मिटा, एक समृद्ध, लोकतान्त्रिक और प्रगतिशील देश बना सकें। हम ऐसी सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक संस्थाओं को बना सकें जो प्रत्येक स्त्री-पुरुष के लिए जीवन की परिपूर्णता और न्याय सुनिश्चित कर सके? कोई भी देश तब तक महान नहीं बन सकता जब तक उसके लोगों की सोच या कर्म संकीर्ण हैं।

— ट्रिस्ट विद डेस्टिनी भाषण के अंश, जवाहरलाल नेहरू

संदर्भ  

भरत वर्मा (२०११). Indian Defence Review Vol 26. 2 [भारतीय रक्षा समीक्षा वॉल्यूम २६. २] (अंग्रेज़ी में). लांसर पब्लिशर्स. पृ॰ १११आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 9788170622192.

 “Great speeches of 20th century” [२०वीं सदी के महान भाषण] (अंग्रेज़ी में). द गार्डियन. मूल से 5 सितंबर 2015 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 15 अगस्त 2015.

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शिक्षा यानी education जो हमारे जीवन को संस्कारित करती है. हमारे जीवन को आकार देती है. प्रेरणा यानी motivation हमे हर परिस्थिती से लढणे का बल प्रदान करती है. Education and motivation ये दोनो शब्द हमारे जीवन में काफी महत्व रखते है. Education और motivation इस विषय को लेकर हिंदी मे ब्लॉग लिख रहा हू, जिसका नाम है worldtruthblog.

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