भारतीय सेना के वीर जवानों काश्मीर क्षेत्र के कारगिल सेक्टर मिळेल असे हुए आतंकवादियों को गिराया. इन आतंकियों के पास से बरा मत किये हुए  हतीयार और सामान से ये स्पष्ट हुआ था कि आतंकियों को पाकिस्तान द्वारा सपोर्ट किया जा रहा था. हिमालय की चोटी पर युद्ध मे शहीद भारतीय जवान की याद मे हर साल 26 जुलाई को Kargil diwas मनाया जाता है. आईये हम जानते है क्या है कारगिल विजय दिवस की कहानी.

पाकिस्तान समर्थक आतंकवादियों ने लाईन ऑफ कंट्रोल को पार करके भारत की हद मे प्रवेश किया था.हिमालय की काही छोटी परी नातं क्यो ने अपना कब्जा जमालिया था.Kargil diwas भारत की सीमा मे घुसे इन आतंकियों को बहार निकालना भारत के लिये बहुत जरुरी था. लेह लदाख को जोडणे वाली सडक पर भी आतंकियों ने अपना कब्जा कर लिया था. इस से हमारी राष्ट्रीय अस्मिता को खतरा पैदा हो गया था. यही कारण ठाकी भारत ने अपने वीर जवानों के माध्यम से पाकिस्तान के सभी आतंकियों को खदेड दिया और जवाब भारत ने दिया.

कारगिल युद्ध के असली हिरो

26 जुलाई 1999 को खतम हुए इस Kargil diwas युद्ध में भारत के जवानों ने अपने पराक्रम की पराकाष्टा की थी.खायल होते हुए भी इं वीर जवानों ने अपने देश की आन बान शान रखते हुए अपने प्रानो की आहुति दे दी. पुढे दोन महिने चले इस युद्ध में विपरीत परिस्थिती होते हुए भी हमारे बहादुर जवानों ने अपना शौर्य दिखाया. आइए जानते है इस युद्ध के असली हिरो के बारे मे.

कॅप्टन विक्रम बत्रा हिमाचलप्रदेश के छोटे से कस्बे पालमपुर के 13 जम्मू-कश्मीर राइफल्स के कैप्टन विक्रम बत्रा उन बहादुरों में से एक हैं, जिन्होंने एक के बाद एक कई सामरिक महत्व की Kargil diwas पर भीषण लड़ाई के बाद फतह हासिल की थी.
यहाँ तक कि पाकिस्तानी लड़ाकों ने भी उनकी बहादुरी को सलाम किया था और उन्हें ‘शेरशाह’ के नाम से नवाजा था.  कॅप्टन बत्रा को मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया.

1/11 गोरखा राइफल्स के लेफ्टिनेंट मनोज पांडेय की बहादुरी की बाते आज भी बटालिक सेक्टर के ‘जुबार टॉप’ पर लिखी है. Kargil diwas गोरखा पलटन लेकर दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में ‘काली माता की जय’ के नारे के साथ उन्होंने दुश्मनों के छक्के छुड़ा दिए थे.

स्क्वाड्रन लीडर अजय आहूजा का विमान भी दुश्मन गोलीबारी का शिकार हुआ.Kargil diwas अजय का लड़ाकू विमान दुश्मन की गोलीबारी में नष्ट हो गया, फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी और पैराशूट से उतरते समय भी शत्रुओं पर गोलीबारी जारी रखी और लड़ते-लड़ते शहीद हो गए.


युद्ध के पश्चात पाकिस्तान के नवाज शरीफ और शीर्ष सैन्य अधिकारियों ने प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से पाक सेना की भूमिका को स्वीकार किया था. यह युद्ध हिमालय के ऊँचाई पर लड़े जाने वाले विश्व के प्रमुख युद्धों में से एक है.

चाहे कोई भी विपरीत परिस्थिती हो हमारे देश के विर जवान संकट का सामना करने के लिए हमेशा सज्ज रहते है. हम देश वासियों को उनके प्रति आपणा आदर प्रेम हमेशा व्यक्त करना चाहिए. कारगिल युद्ध मे शहीद जवानों को सन्मान देणे के लिये 26 जुलै को Kargil diwas मनाया जाता है. यही है कारगिल विजय दिवस की कहानी.

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शिक्षा यानी education जो हमारे जीवन को संस्कारित करती है. हमारे जीवन को आकार देती है. प्रेरणा यानी motivation हमे हर परिस्थिती से लढणे का बल प्रदान करती है. Education and motivation ये दोनो शब्द हमारे जीवन में काफी महत्व रखते है. Education और motivation इस विषय को लेकर हिंदी मे ब्लॉग लिख रहा हू, जिसका नाम है worldtruthblog.

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