भारत के उत्तराखण्ड राज्य के रूद्रप्रयाग जिले मे Kedarnath temple है. पत्‍थरों से बने कत्यूरी शैली से बने इस मन्दिर को पाण्डव के वंशज ने निर्माण  किया था. मंदिर मे स्वयम्भू शिवलिंग है. आइये जानते क्या है केदारनाथ की कथा.

भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में सर्वोच्च स्थानपर केदारेश्वर ज्योतिर्लिंग है. यह Kedarnath temple तीन तरफ पहाड़ों से घिरा है. एक तरफ 22 हजार फुट ऊंचा केदारनाथ, दूसरी तरफ 21 हजार 600 फुट ऊंचा खर्चकुंड और तीसरी तरफ 22 हजार 700 फुट ऊंचा भरतकुंड. यहा मं‍दाकिनी, मधुगंगा, क्षीरगंगा, सरस्वती और स्वर्णगौरी इन पांच नदियोका संगम भी है. यह शिव मंदिर कटवां पत्थरों के विशाल शिलाखंडों को जोड़कर बनाया गया है. मंदिर लगभग 6 फुट ऊंचे चबूतरे पर बना है. गर्भगृह प्राचीन है जिसे 80वीं शताब्दी का माना जाता है. मंदिर 85 फुट ऊंचा, 187 फुट लंबा और 80 फुट चौड़ा है.

Kedarnath temple की कहानी

महाभारत युद्ध के बाद पांडव भ्रातृहत्या के पाप से मुक्ति पाना चाहते थे. वे भगवान शंकर का आशीर्वाद पाना चाहते थे, लेकिन महादेव उनसे रुष्ट थे. भगवान को खोजते पांडव हिमालय तक आ पहुंचे. भगवान शंकर पांडवों को दर्शन नहीं देना चाहते थे, इसलिए वे केदार में जा बसे. पांडव भी लगन के पक्के थे, वे भी केदार पहुंच गए. भगवान शंकर ने तब तक बैल का रूप धारण कर लिया और वे अन्य पशुओं में जा मिले. भीम ने विशाल रूप धारण कर दो पहाडों पर पैर फैला दिया. अन्य गाय-बैल तो निकल गए, पर शंकर जी रूपी बैल पैर के नीचे से जाने को तैयार नहीं हुए. भीमने बलपूर्वक इस बैल की त्रिकोणात्मक पीठ का भाग पकड़ लिया. भगवान शंकर पांडवों की भक्ति देख कर प्रसन्न हो गए. उन्होंने तत्काल दर्शन देकर पांडवों को पाप मुक्त कर दिया. उसी समय से भगवान शंकर बैल की पीठ की आकृति-पिंड के रूप में श्री केदारनाथ में पूजे जाते हैं. माना जाता है कि जब भगवान शंकर बैल के रूप में अंतर्ध्यान हुए, तो उनके धड़ से ऊपर का भाग काठमाण्डू में प्रकट हुआ. अब वहां पशुपतिनाथ का प्रसिद्ध मंदिर है. शिव की भुजाएं तुंगनाथ में, मुख रुद्रनाथ में,Kedarnath temple नाभि मद्महेश्वर में और जटा कल्पेश्वर में प्रकट हुए. इसलिए इन चार स्थानों सहित श्री केदारनाथ को पंचकेदार कहा जाता है.

मंदिर के कपाट खुलने का समय

दीपावली महापर्व के दूसरे दिन (पड़वा) के दिन शीत ऋतु में Kedarnath temple के द्वार बंद कर दिए जाते हैं. 6 माह तक दीपक जलता रहता है. 6 माह बाद मई माह में केदारनाथ के कपाट खुलते हैं तब उत्तराखंड की यात्रा आरंभ होती है.

केदारनाथ धाम की मान्यताएं

लिंग पुराण के मतानुसार जो मनुष्य संन्यास लेकर केदारकुण्ड में निवास करता है, वह शिव समान हो जाता है.

पद्म पुराण में कहा गया है कि  “जब कुंभ राशि पर सूर्य तथा गुरु ग्रह स्थित हो, तब Kedarnath temple का दर्शन तथा स्पर्श मोक्ष प्रदान करता है.

शिवपुराण में कहा गया है कि Kedarnath temple में जो तीर्थयात्री आते है, उन्हें स्वर्ग की प्राप्ति होती है.

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शिक्षा यानी education जो हमारे जीवन को संस्कारित करती है. हमारे जीवन को आकार देती है. प्रेरणा यानी motivation हमे हर परिस्थिती से लढणे का बल प्रदान करती है. Education and motivation ये दोनो शब्द हमारे जीवन में काफी महत्व रखते है. Education और motivation इस विषय को लेकर हिंदी मे ब्लॉग लिख रहा हू, जिसका नाम है worldtruthblog.

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