राष्ट्रपिता महात्मा गांधीजीने अपने देश को आजादी दिलाने मे महत्त्वपूर्ण भूमिका निभायी है. आजादी के लिये उन्होंने कई आंदोलन किए. जिसमे non cooperation movement असहयोग आंदोलन भी शामील है. महात्मा गांधीजी ने 1 ऑगस्ट 1920 को यह non cooperation movementआदोलन किया था. आज उसे सौ साल पूरे हो गये है. अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ छिडा यह बडा आंदोलन था.

Non cooperation movement

अंग्रेज हुक्मरानों की ज्यादतियों का विरोध करने के लिए महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन की शुरुआत की. आंदोलन के दौरान विद्यार्थियों ने सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में जाना छोड़ दिया.
वकीलों ने अदालत में जाने से मना कर दिया. कई कस्बों और नगरों में श्रमिक हड़ताल पर चले गए. इससे 70 लाख कार्यदिवसों का नुकसान हुआ. शहरों से लेकर देहात में आंदोलन का असर दिखाई पडा. सन 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के बाद Non cooperation movement से पहली बार अंग्रेजी राज की नींव हिल गई.

आंदोलन करने के कारण

1919 में पारित रौलट एक्ट के तहत, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे मौलिक अधिकारों पर अंकुश लगाया गया और इसने पुलिस शक्तियों को बढ़ाया गया.
13 अप्रैल 1919 को जनरल डायर ने जलियांवाला बाग में एकत्रित हजारों लोगों पर गोलियां चलाईं जिनमें सैकड़ों लोग मारे गए.
प्रथम विश्व युद्ध ने देश में रक्षा व्यय में भारी वृद्धि की गई, सीमा शुल्क बढ़ाया गया और आयकर पेश किया गया. 1913 और 1918 के बीच के वर्ष के दौरान कीमतें बढ़कर दोगुनी हो गईं, जिससे आम लोगों के लिए अत्यधिक कठिनाई हुई.
इन सभी कारनोका विरोध करनेके लिये Non cooperation movement किया गया.

आंदोलन की उपलब्धी

हिंदू स्वराज इस किताब मे गांधीजी ने कहा था, भारतीयके सहयोग से ही ब्रिटिश भारत मे रह सकते है. अगर भारतीयाने सहयोग किया तो, हम ब्रिटिश साम्राज्य को खतम कर सकते है.
अंग्रेजों की क्रूरताओं के खिलाफ लड़ने के लिए शुरू में केवल अहिंसक साधनों को अपनाया गया था.
इस Non cooperation movement ने अपनी रफ़्तार सरकार द्वारा प्रदान की गई उपाधियों को लौटाकर, और सिविल सेवाओं, सेना, पुलिस, अदालतों और विधान परिषदों, स्कूलों, और विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार करके किया गया.
देश में विदेशी सामानों का बहिष्कार किया गया. शराब की दुकानों को बंद कर दिया गया.
विदेशी कपड़ो की होली जलाई गयी.
मोतीलाल नेहरू, सी. आर. दास, सी. राजगोपालाचारी और आसफ अली जैसे कई वकीलों ने अपनी प्रैक्टिस छोड़ दी.
आंदोलन के चलते विदेशी कपडो का त्याग करके, भारतीय कपड़ो को पहनना शुरू कर दिया.

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शिक्षा यानी education जो हमारे जीवन को संस्कारित करती है. हमारे जीवन को आकार देती है. प्रेरणा यानी motivation हमे हर परिस्थिती से लढणे का बल प्रदान करती है. Education and motivation ये दोनो शब्द हमारे जीवन में काफी महत्व रखते है. Education और motivation इस विषय को लेकर हिंदी मे ब्लॉग लिख रहा हू, जिसका नाम है worldtruthblog.

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