हमारे स्वतंत्रता संग्राम मे quit India भारत छोडो आंदोलन महत्त्वपूर्ण रहा है. इस आंदोलन को क्रांती के रूप में जाना जाता है. इस आंदोलन का नारा था अँग्रेजो भारत छोडो quit India. इस आंदोलन की तीव्रता कितनी थी सचमुच में अंग्रेजो को भारत छोडके जाना पडा. जानते है भारत छोडो आंदोलन क्यों चालाया गया. 

द्वितीय विश्वयुद्ध (Second Word War) में जगह-जगह मित्रराष्ट्रों की पराजय से अंग्रेजों के हौसले पहले से ही चूर हो गए थे. भारत पर जापानी आक्रमण का खतरा बढ़ गया था. लेकिन गाँधीजी का विचार था कि अंग्रेजों की उपस्थिति के कारण ही जापान भारत पर आक्रमण करना चाहता है, इसलिए उन्होंने अंग्रेजों को भारत छोड़ने तथा भारतीयों के हाथ में सत्ता सौंपने की माँग की. 

Do or die करो या मरो

1942 ई. में वर्धा में कांग्रेस की बैठक हुई और गांधीजी तथा सरदार पटेल के प्रयास से “अहिंसक विद्रोह (Nonviolent protest)” का कार्यक्रम पारित हुआ. पुनः 8 अगस्त, 1942 ई.  अबुल कलाम आजाद की अध्यक्षता में बम्बई कांग्रेस महासमिति की बैठक हुई जिसमें भारत छोड़ो प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई. नेताओं के जेल चले जाने से भारत चुप नहीं हो गया. “करो या मरो (Do or Die)” का नारा लोगों ने अपना लिया था. हर जगह प्रदर्शन किये जा रहे थे. सारे देश में हिंसक कार्यवाही फूट पड़ी थी.

महत्वपूर्ण आंदोलन

हालाँकि अगस्त आन्दोलन/Quit India Movement सफल नहीं हो सका. लेकिन फिर भी भारत के अन्य आन्दोलनों की तुलना में यह महत्त्वपूर्ण साबित हुआ. इस आन्दोलन ने जन-अन्सतोष को चरम बिंदु पर पहुँचा दिया. अंग्रेजों का भारत छोड़कर जाना निश्चित हो गया. हमें पाँच वर्षों के अन्दर ही आजादी मिल गई.

आंदोलन के कारण

भारत पर जापानी आक्रमण की आशंका बढ़ गई थी. सिंगापुर, मलाया और बर्मा को छोड़ने के लिए अंग्रेजों को विवश हो जाना पड़ा. बंगाल छोड़ने के पहले सत्ता भारतीयों के हाथ में हस्तांतरित करने के लिए अगस्त-आन्दोलन प्रारम्भ किया गया था. भारतीयों के साथ ब्रिटिश सरकार के व्यवहार से क्षुब्ध होकर गाँधी ने अगस्त-आन्दोलन की घोषणा की. सरकार की तानाशाही के विरोध में आन्दोलन प्रारम्भ करना आवश्यक हो गया था. ऐसी अवस्था में गांधीजी ने भारत छोड़ो आन्दोलन की घोषणा की और भारत को स्वतंत्र बनाने के लिए “करो या मरो” का मन्त्र दिया.

आंदोलन हुआ तीव्र

9 अगस्त, 1942 में महात्मा गाँधी, वर्किंग कमिटी के सदस्य तथा अन्य अनेक नेता बम्बई तथा देश के अन्य भागों में गिरफ्तार कर लिए गये.  राजेन्द्र प्रसाद पटना में नजरबंद किये गये. जय प्रकाश नारायण को हजारीबाग के केन्द्रीय कारावास में रखा गया.  सारे नेता जेल में थे, अतः उनको रोकने वाला कोई नहीं था. फलतः गुस्से में जनता ने हिंसा और विरोध  का सहारा लिया. उत्तर प्रदेश, बिहार, उड़ीसा, आन्ध्र प्रदेश, तमिलनाडु तथा महाराष्ट्र में कई स्थानों पर विद्रोहियों ने अस्थायी नियंत्रण अपने हाथों में ले लिया. 

सरकार का दमन चक्र

सरकार ने भी अपना दमन चक्र चलाया और लगभग 10,000 व्यक्तियों को मौत के घाट उतार दिया. मुस्लिम लीग इस आन्दोलन से अलग रही. जिन्ना ने 23 मार्च, 1943 को ‘पाकिस्तान दिवस’ मनाने का आह्नान किया. समस्त भारत के मुसलमानों से कहा कि पाकिस्तान ही मुसलमानों का राष्ट्रीय उद्देश्य है. जिन्ना ने अंग्रेजों के विरुद्ध ‘बांटो और भागो’ का नारा भी दिया. लीग ने भी इसका समर्थन किया. रूसी प्रभाव में आकर कम्युनिष्ट पार्टी भी आन्दोलन विरोधी बन गयी. फलतः पूर्ण समर्थन के अभाव में और सरकारी दमन के कारण 1942 की क्रांति असफल हो गयी. 

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शिक्षा यानी education जो हमारे जीवन को संस्कारित करती है. हमारे जीवन को आकार देती है. प्रेरणा यानी motivation हमे हर परिस्थिती से लढणे का बल प्रदान करती है. Education and motivation ये दोनो शब्द हमारे जीवन में काफी महत्व रखते है. Education और motivation इस विषय को लेकर हिंदी मे ब्लॉग लिख रहा हू, जिसका नाम है worldtruthblog.

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