हमारा देश प्राचीन संस्कृती और परंपरा को सनजोता हुआ आधुनिकता की और बढता रहा है. कई साल पुरानी परंपरा आज भी आधुनिक द्वार मे हमे देखने को मिलती है. अनेक परंपरा ओ मे से एक Raksha Bandhan भी है. रक्षाबंधन एक त्योहार  बन गया है भाई और बहन के प्रेम का यह त्योहार पूरे देश मे उल्हास के साथ मनाया जाता है. सावन महिने की पूर्णीमा को यह त्योहार मनाया जाता है. आइए जानते है रक्षाबंधन की शुरुवात कैसे हुई.

अपने बहन की सुरक्षा करने हेतू हर भाई तत्पर रहता है. बहन अपने भाई के लिए शुभकामना करती है भगवान से प्रार्थना करती है. इसीलिये वह भाई के कलाई पर Raksha Bandhan बांधती है. भाई और बहन के पवित्र प्रेम के रिश्ते को दोनो जीवनभर निभाते है.बहन जब भी कोई संकट मे आती है तो भाई उसकी रक्षा के लिए आता है. रक्षाबंधन को एक ऐतिहासिक और धार्मिक परंपरा भी है जिस से कुछ कहानिया भी जुडी हुई है.

राजा बली और महालक्ष्मी का Raksha Bandhan

राजा बली ने तपस्या करके स्वर्ग पर अधिकार जमाने की कोशिश की जिससे देवराज इंद्र घबरा गये. उन्होने संकट के निवारण हेतू भगवान विष्णू से प्रार्थना की. भगवान विष्णूने वामन अवतार लेकर बलीराजा से दिन पग धरती मांग ली. भगवान वामने दो मे आकाश-पाताल नाप लिया और तिसरा बली के सर पर रखते हुए उन्हे पाताल लोक भेज दिया. लेकिन राजा बली ने अपने भक्ति से भगवान विष्णू को हर समय अपने साथ रहने का वचन ले लिया.इस्से देवलोक मे चिंता का वातावरण बन गया था. माता लक्ष्मी ने प्रश्न से मार्ग निकाला वे राजा बली के पास गई और उसे अपना भाई बनाया उनके कलाई पर रक्षा कवच बांधा और संकल्प करके भगवान विष्णु को वहा से वापस ले आई. सी समय से Raksha Bandhan का चालू हो गया.

भगवान कृष्ण को बांधी द्रौपदीने राखी

महाभारत के काल से यही कथा आगे चलते आई है. शिशुपाल का वध करणे के बाद भगवान श्रीकृष्ण के उंगली मे चोट खाई थी और उसमे से खून बह रहा था. उस समय सभी बहती उंगली से खून रोकने के लिए कपडा धुंडणे के लिए गये तो पास ही खडी द्रौपदीने अपनी साडी का पल्लू फाडकर भगवान कृष्ण की उंगली को बांधा था. जिस से कृष्ण के उंगली से बेहता खून रुक गया था. यह दिन श्रावण मास की पूर्णिमा का था ऐसा माना जाता है. द्रौपदी के प्रेम और स्नेह के कारण कृष्ण द्रौपदी के Raksha Bandhan से बंध गये थे इसीलिये चिरहरण के समय भगवान ने द्रौपदी के लाज की रक्षा की थी. कुरुक्षेत्र मे जब महाभारत का युद्ध शुरू होने वाला था उस समय भगवान कृष्ण ने पांडव से कहा था कि सभी सैनिको को रक्षासूत्र बांधा जाये. रक्षाबंधन का त्योहार सैनिको के साथ मनाये जिस से उनकी रक्षा होगी.

आधुनिक दौर मे भी महत्व Raksha Bandhan का

आज के आधुनिक दौर मे भी Raksha Bandhan का प्राचीन महत्व टीका हुआ है. आज भी भाई अपने बहन के रक्षा के लिए खडा रहता है. बहन भी अपने भाई के सलाम ती की दुवा मांगते रहती है. मोबाईल इंटरनेट के माध्यम से भाई बहन एक दुसरे को शुभेच्छा संदेश भी भेजते है.  हमारी हिंदी फिल्म मे भी रक्षाबंधन के संदर्भ में बहुत सारे गीत लिखे गये है. जो आज भी सबको प्रिय है और यह गीत आज भी सुने जाते है. 

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शिक्षा यानी education जो हमारे जीवन को संस्कारित करती है. हमारे जीवन को आकार देती है. प्रेरणा यानी motivation हमे हर परिस्थिती से लढणे का बल प्रदान करती है. Education and motivation ये दोनो शब्द हमारे जीवन में काफी महत्व रखते है. Education और motivation इस विषय को लेकर हिंदी मे ब्लॉग लिख रहा हू, जिसका नाम है worldtruthblog.

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