प्रभू श्रीरामचंद्र कि जन्मभूमी आयोध्या मे श्री राम मंदिर का निर्माण किया जा रहा है. जिसका भूमिपूजन 5 अगस्त को होने जा रहा है. इस मंदिर को लेकर देश वासियों के मन मे श्रद्धा का वातावरण निर्माण हुआ है. पिछले कई सालो से मंदिर के संदर्भ मे काफी उथल पुथल हो चुकी है. जानते है Ram Mandir Ayodhya, आयोध्या के राम मंदिर के बारे मे.

राम मंदिर विवाद

आयोध्या मे बना श्रीराम मंदिर और बाबरी मज्जिद के बारेमे काफी विवाद चले अा रहे है. पिछले कुछ बरसो से यह विवाद चलते आ रहा है. अभी हाल ही मे न्यायालय मे इस जगह के बारे में अपना फैसला सुनाया है. जिसके चलते 5 ऑगस्ट को राम मंदिर का भूमिपूजन किया जा रहा है.

राम मंदिर एक नजर

राम मंदिर के निर्माण का मुद्दा लेकर भारतीय जनता पार्टी सत्ता मे आई.

प्रधानमंत्री मोदी ने संघ प्रमुख मोहन भागवत की यह मांग भी नहीं मानी कि सरकार क़ानून बनाकर मंदिर निर्माण का रास्ता प्रशस्त करे.

श्री श्री रविशंकर ने निजी स्तर पर मामला सुलझाने की कोशिश की थी, लेकिन उनका ज़ोर इस पर रहा कि वहाँ मंदिर ही बनाना चाहिए यानी मुस्लिम पक्ष दावा वापस ले.

प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले सुप्रीम कोर्ट फ़ैसला सुनाए फिर सरकार कुछ करेगी.

पिछली तारीख़ में सुप्रीम कोर्ट ने दोनो पक्षों के अनुवाद चेक करने के लिए आठ हफ़्ते का समय दिया ताकि औपचारिक सुनवाई शुरू हो सके.

राम मंदिर का निर्माण

सारे विवाद और न्यायालय के फैसले के बाद अब राम मंदिर के निर्माण का कार्य शुरू हो रहा है. यह मंदिर भारत के अन्य मंदिर की तरह भव्य होने वाला है. मंदिर के निर्माण कार्य आर्किटेक्ट चंद्रकांत सोमपुरा को दिया गया है. चंद्रकांत सोमपुरा के बाबा प्रभाशंकर सोमपुरा ने ही सोमनाथ मंदिर का निर्माण किया था.

चंद्रकांत सोमपुरा के मुताबिक़, इस मंदिर में तीन गुंबद होंगे और मंदिर की ऊंचाई 161 फ़ीट होगी.

इसके मंदिर में 366 खंबे होंगे और सीड़ियों की चौड़ाई 16 फ़ीट होगी.

सीता, लक्ष्मण, गणेश और हनुमान के लिए अलग अलग मंदिर बनाए जाएंगे. इस मंदिर के निर्माण में 6 लाख क्युबिक फ़ीट पत्थर लगेगा.

ये मंदिर आगामी तीन से चार सालों में बनकर तैयार हो जाएगा.

यह मंदिर दो मंजीला होगा.

मंदिर का निर्माण नागर शैली मे किया जा रहा है. नागर शैली उत्तर भारतीय हिन्दू स्थापत्य कला की तीन में से एक शैली है. वास्तुशास्त्र के अनुसार नागर शैली के मंदिरों की पहचान आधार से लेकर सर्वोच्च अंश तक इसका चतुष्कोण होना है. इस प्रकार के मंदिर के सबसे ऊपर शिखर होता है, जिसे रेखा शिखर भी कहते हैं.

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शिक्षा यानी education जो हमारे जीवन को संस्कारित करती है. हमारे जीवन को आकार देती है. प्रेरणा यानी motivation हमे हर परिस्थिती से लढणे का बल प्रदान करती है. Education and motivation ये दोनो शब्द हमारे जीवन में काफी महत्व रखते है. Education और motivation इस विषय को लेकर हिंदी मे ब्लॉग लिख रहा हू, जिसका नाम है worldtruthblog.

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