हाल ही मे सावन का महीना शुरू हुआ है. इस महीने में महादेव की पूजा अर्चना की जाती है. साथी ही महादेव के अतिप्रिय फल यांनी रुद्राक्ष-धारण भी किया जाता है. ऐसा कहा जाता है कि रुद्राक्ष महादेव की नेत्र से निकले हुए अश्रू फल है. भारत मे Rudraksha धारण करने का विधि बताया जाता है. रुद्राक्ष विविध स्वरूप नही मिलते है.एक मुखी से लेकर 21 मुखी रुद्राक्ष प्राप्त होते है. आई ये आज हम जानते है असली रुद्राक्ष को कैसे पहचाने.

Rudraksha: की पहचान

किसी भी आकार का Rudraksha पूरी तरह से पानी में डूब जाता है. यह सुनिश्चित करने में कोई समस्या नहीं है कि आसानी से पानी में डूबा हुआ रुद्राक्ष वास्तविक है.

रुद्राक्ष को पाँच से दस मिनट के लिए हाथ की हथेली में कस कर पकड़ा जाये तो उसके बाद यदी हम उसे कान को लगाते है तो उस्मे से मंजुल ध्वनी सुनाई देती है.

जब रुद्राक्ष को 2 तांबे के बर्तन में रखा जाता है, तो असली रुद्राक्ष तुरंत गति पकडता है.

अगर इसे ६-, घंटे तक उबलते पानी में रखा जाए, तो भी यह सड़ता नहीं है, क्योंकि असली रुद्राक्ष तैरता नहीं है.

अगर आप लंबे समय तक दूध में असली Rudraksha रखते हैं, तो दूध खराब नही होता है.

रुद्राक्ष मुख्य रूप से गोल होता है. यह कांटेदार दिखता है, लेकिन यह खुरदरा होता है और इसमें बहुत कठोरता होती है.

Rudraksha: का पेड

रुद्राक्ष एक वृक्ष का फल है. रुद्राक्ष का पेड़ मध्यम ऊंचाई का होता है. ये पेड़ Nepal, Bhutan, Kedarnath and Himalaya क्षेत्र में पाए जाते हैं. इसके फल को Rudraksha कहा जाता है. पेड़ पर एक ढाल है. जब आप इसे बाहर निकालते हैं तो बीज रुद्राक्ष होता है. रुद्राक्ष के शरीर में एक छेद होता है, लेकिन इसे अच्छी तरह से साफ करना होता है. भीतर की लाठी आदि को हटाना पड़ता है. यह समुद्र तल से 3,000 मीटर की ऊंचाई पर पाया जाता है. रुद्राक्ष के पेड़ सतह पर नहीं उगते हैं. इस पेड़ की पत्तियाँ इमली या लौकी के समान होती हैं. यह साल में एक से दो हजार फल देता है.

Rudraksha : मंत्र सिद्धी के लिए उपयोग

रुद्राक्षमाला को गले में पहनकर किया गया जप आदि रुद्राक्षमाला के बिना किए गए जप की तुलना में हजार गुना अधिक लाभकारी होता है, जबकि Rudraksha की माला से किया गया जप किसी अन्य प्रकार के हार की तुलना में दस हजार गुना अधिक लाभकारी होता है; इसीलिए शैव लोग मानते हैं कि मंत्रों का जप या धारण किए बिना रुद्राक्षमाला जल्दी मंत्र सिद्धि प्राप्त नहीं करती है.

योगियों के अनुसार, जीवन शक्ति (या विद्युत शक्ति) को नियंत्रित करने वाली शक्ति रुद्राक्ष (रुद्राक्ष मंजिल) में है. रुद्राक्ष माला से मंत्र साधक मन की शक्ति को नियंत्रित कर सकता है.

Rudraksha सभी जातियों, जनजातियों, पुरुषों और महिलाओं द्वारा पहना जा सकता है.

रुद्राक्ष में कांटे होते हैं. इन सीधी रेखाओं को मुंह कहा जाता है. रुद्राक्ष पर जितनी अधिक रेखाएँ होती हैं, उतने ही उसके मुख होते है.

Rudraksha : सावधानिया रखे

रुद्राक्ष की जड़ ब्रह्मा है, गर्भनाल (छिद्र) विष्णु है और मुख रुद्र है. साथ ही रुद्राक्ष में विद्यमान बिंदु (कांटे) सभी देवता हैं. छह प्रकार के Rudraksha का उपयोग करना उचित नहीं है जो कीड़े द्वारा खाए जाते हैं, टूटे हुए, बिना कांटे, छिद्रित और अनुपयुक्त होते हैं. Rudraksha पहनने वाले व्यक्ति को शराब, मांस, लहसुन, प्याज आदि का सेवन नहीं करना चाहिए. सात्विक भोजन और शुद्ध दिनचर्या करनी चाहिए. चित्त को झूठे विषयों और पाप कर्मों से दूर रखना चाहिए. शुद्ध विचार मनुष्य की मानसिक शांति का दाता है.

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शिक्षा यानी education जो हमारे जीवन को संस्कारित करती है. हमारे जीवन को आकार देती है. प्रेरणा यानी motivation हमे हर परिस्थिती से लढणे का बल प्रदान करती है. Education and motivation ये दोनो शब्द हमारे जीवन में काफी महत्व रखते है. Education और motivation इस विषय को लेकर हिंदी मे ब्लॉग लिख रहा हू, जिसका नाम है worldtruthblog.

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