दोस्तो हमारा देश प्राचीन परंपरा को संजोकर रखनेवाला है. प्राचीनता के अद्भुत, अनोखी कारागिरी आज भी हमे देश के कई भागो मे देखणे मिलती है. आज हम जनते है महादेव के अतिप्राचीन शिव मंदिर Somnath temple के बारे मे. जानते है Somnath templeका निर्माण कब हुआ.

चंद्र देव ने बनाया Somnath temple

Somnath temple shiv को समर्पित है। यह भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से सबसे पहला ज्योतिर्लिंग है. ज्योतिर्लिंग उन स्थानों को कहते है जहाँ भगवान शिव स्वयं प्रकट हुए थे. सोमनाथ मंदिर विश्व प्रसिद्ध धार्मिक तीर्थस्थान और पर्यटन स्थल है. इस मंदिर का निर्माण स्वयं चन्द्र देव ने करवाया था. अब तक यह Somnath temple कई बार नष्ट हो चुका है और दूबारा उतनी ही विशालता से इसका पुननिर्माण किया गया.  

मंदिर की विशेषताये

यह मंदिर गर्भगृह, सभामंडप और नृत्यमंडप- तीन प्रमुख भागों में विभाजित है. Somnath temple ka 150 फुट ऊंचा शिखर है. इसके शिखर पर स्थित कलश का भार दस टन है और इसकी ध्वजा 27 फुट ऊंची है. इस मंदिर का पुनर्निर्माण महारानी अहिल्याबाई ने करवाया था. ऐतिहासिक सूत्रों के अनुसार आक्रमणकारियों ने इस Somnath temple पर 6 बार आक्रमण किया. भारत की आजादी के बाद सरदार बल्लभभाई पटेल, महाराष्ट्र के काकासाहब गाडगीलजी की सलाह से श्री Somnath templeका जीर्णोद्धार किया. शुक्रवार 11 मई 1951 को श्री Somnath temple ज्योतिर्लिंग की प्राणप्रतिष्ठा उस समय के भारत के राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसादजी के द्वारा और वेदमूर्ति तर्कतीर्थ लक्ष्मण शास्त्री जोशीजी के वेदघोष से की गई.

सोमनाथ मंदिर का शिवलींग

मंदिर से जुडे रोचक तथ्य


गुजरात में स्थित Somnath temple के दक्षिण में समुद्र के किनारे एक खंभा बना हुआ है, जिसके ऊपर एक तीर रखकर यह प्रदर्शित किया गया है कि, Somnath temple मंदिर और दक्षिण ध्रुव के बीच में भूमि का कोई भी हिस्सा मौजूद नहीं है.

यह पहले प्रभासक्षेत्र या फिर प्रभासपाटण के नाम से जाना जाता है. इसी स्थान पर भगवान श्री कृष्ण ने अपना शरीर छोड़ा था. सोमनाथ मंदिर से करीब 200 किलोमीटर की दूरी पर द्धारका नगरी है, जहां द्धारकाधीश के दर्शन करने दूर-दूर से लोग आते हैं.

भगवान शिव को समर्पित इस में स्थित शिवलिंग में रेडियोधर्मी गुण है, जो कि पृथ्वी के ऊपर अपना संतुलन बेहद अच्छे से बनाए रखती है.

कार्तिक, चैत्र एवं भाद्र महीने में श्राद्ध करने का बहुद महत्व हैं, इन तीनों महीनों में यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं.

गुजरात के वेरावल बंदरगाह के पास प्रभास पाटन में स्थित जी, भारत के 12 प्रमुख ज्योतिर्लिंग में से सबसे पहला ज्योतिर्लिंग है, इसकी स्थापना के बाद अगला ज्योतिर्लिंग रामेश्वरम, द्धारका और वाराणसी में स्थापित किया गया था.

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शिक्षा यानी education जो हमारे जीवन को संस्कारित करती है. हमारे जीवन को आकार देती है. प्रेरणा यानी motivation हमे हर परिस्थिती से लढणे का बल प्रदान करती है. Education and motivation ये दोनो शब्द हमारे जीवन में काफी महत्व रखते है. Education और motivation इस विषय को लेकर हिंदी मे ब्लॉग लिख रहा हू, जिसका नाम है worldtruthblog.

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